कोरोना की रोकथाम के लिए भारत है कितना तैयार
कोरोना की रोकथाम के लिए भारत है कितना तैयार
आज हर कोई सिर्फ और सिर्फ कोरोना वायरस के बारे में सोच रहा है। इस महात्रासदी
ने सभी खबरों को पीछे छोड़ दिया है। जहाँ सरकारें इस घातक महामारी की रोकथाम के
लिए जूझ रहीं हैं, वहीं सारे विश्व में डर और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। पूर्ण
लाकडाउन और तमाम प्रतिबंधों के बीच यह मानव जीवन के हर एक क्षेत्र में बदलाव लाने
वाला है।
भारत ने भी बेहद तेजी के साथ इस महामारी से लड़ने के तैयार हुआ है। शुरुआत में
भले ही देखने में मरीजों की संख्या कम थी पर सरकार ने समय पर सख्त कदम उठाये हैं,
लेकिन आगे और भी सख्त कदम उठाये जाने बाकी हैं। भारत में अब तक कोविड-19 से
संक्रमित मरीजों की संख्या 878 पहुँच चुकी है। इनमें से अभी तक 19 मौतें इस बीमारी
के कारण हो चुकीं हैं। पूरे देश में पूर्ण रूप से लाकडाउन लगाने के बाद किसी भी
प्रकार की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। राज्य सरकारों और प्रशासन को सख्त आदेश
दिये गये हैं कि किसी प्रकार से कोई घर से बाहर ना निकले। भारत पहले से ही बढ़ती आबादी की चपेट में है। विश्व
में भले ही जनसंख्या के मामले में चीन के बाद भारत दूसरे नंबर पर हो लेकिन भारत का
जनसंख्या घनत्व चीन से कई ज्यादा है। प्रति वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में जहाँ
चीन में 148 लोग रहते है वहीं भारत में 420 लोग इतनी जगह में रहते हैं। इसलिए यह
महामारी और भी गंभीर हो जाती है अगर एक बार तेजी से फैलना शुरू हो गई तब इसकी
रोकथाम बहुत बड़ी मुश्किल बन जाएगी। क्योंकि भारत के बड़े और औद्यौगिक शहरों में ज्यादातर
आबादी बस्तियों, झुग्गियों और स्लम्स में रहती है जहाँ किसी भी प्रकार की सफाई तथा
सामाजिक दूरी जैसी बात बेहद कठिन है। भारत में सबसे ज्यादा 177 केस महाराष्ट्र से
हैं, इसमें भी सिर्फ मुंबई और पूणे से ही सबसे ज्यादा 47 और 31 मामले सामने आ चुके
हैं जिसमें मुंबई में 5 लोगों की मौत कोरोना से हो चुकी है। इन्हीं महानगरों में
सबसे ज्यादा झुग्गियाँ हैं और चुनौतियाँ भी कठिन हैं।
सोशल मीडिया पर जागरुकता जरूरी
लोगों में जागरुकता फैलाने में इंटरनेट और सोशल मीडिया बेहद ही अहम रोल अदा कर
रहा है। लेकिन साथ ही साथ सोशल मीडिया पर बहुत सारी अफवाहें भी चल रहीं हैं। इन
अफवाहों से इस महामारी के समय बचने की जरूरत है। कोई कुँए में पानी डालने को कह
रहा है तो कहीं पर झांसी के एक डाक्टर से 700 मरीजों को कोरोना फैलने की अफवाह
फैलाई जा रही थी। कहीं कहीं तो लोगों ने इन 700 में से एक की कोरोना से मौत की बात
तक कह डाली थी। इसलिए सबसे जरूरी इन अफवाहों से बचना है जिससे लोगों में दहशत का
माहौल न पैदा हो।
नहीं होगी किसी भी सामान की कमी
जरूरती सभी सामानों की उपलब्धता बनाये रखने के लिए सभी सरकारें जुट गयीं हैं।
सभी जिलों में प्रशासन के द्वारा डोर टू डोर जा कर खाद्य सामग्री का वितरण
सुनिश्चित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अपील है कि किसी भी
प्रकार से कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। केन्द्र सरकार ने भी अपने सभी राष्ट्रीय
भण्डार खोल दिये हैं। सरकार ने सभी आनलाईन किराना कंपनियों को अपना कारोबार करने
की छूट दी है जिससे वे घरेलू आपूर्ती को बनाय रखें। इन कंपनी के कर्मचारियों में लेकिन
डर अब भी बना हुआ है। कंपनी के लिए ये एक चुनौती होगी के वे अपने कर्मचारियों को
वापस काम पर बुला सकें। बड़े शहरों में अधिकांश काम करने वाले लोग अपने घरों की
तरफ वापस चले गये हैं। पुलिस के डर के कारण भी अधिकांश डिलीवरी कर्मचारी काम करने
में कतरा रहे हैं।
राहत बन रहीं राज्य सरकारों की योजनाऐं
कोरोना महामारी से बचने के लिए राज्य सरकारों ने भी अलग से कई सारी योजनाऐं
लांच कर दी हैं।
· केन्द्र के द्वारा दी
जाने वाली योजनाओं में मनरेगा में काम करने वाले मजदूरों की 20 रुपये प्रतीदिन के
हिसाब से मजदूरी बढ़ाई जाएगी। महिला जनधन खातों में 500 रुपये दिये जाएंगे।
उज्जवला योजना के लाभार्थियों को 3 मुफ्त गैस के सिलिण्डर, वृद्ध और गरीब विधवाओं
को 1000 रुपये अतिरिक्त मुहैया कराये जाऐंगे। पीएम किसान की पहली किस्त का भी
अग्रिम भुगतान किया जाएगा।
· योगी सरकार ने लगभग 35.3
लाख देहाड़ी मजदूरों के खाते में सीधे पैसा भेजना शुरू कर दिया है। खजाने पर इस
भुगतान का 353 करोड़ का भार आएगा। मनरेगा और अंत्योदय से जुड़े लोगों को मुफ्त
अनाज का वितरण भी सुनिश्चित किया है। सामाजिक संगठनों के सहयोग द्वारा सरकार
बेसहारा लोगों को सामुदायिक रसोई के माध्यम से फूड पैकेट का वितरण भी करवा रही है।
जो मजदूर रास्ते में फंसे हुए हैं उन्हे भी उनके घर तक सकुशल पहुँचाने का काम भी
किया जा रहा है।
· दिल्ली की सरकार ने भी
दस लाख लोगों के खाने और रहने के लिए रैन बसेरों का उचित इंतजाम कर रही है।
महिलाओं को सीधे खाते में अग्रिम पेंशन पहुँचाई जा रही है।
· तेलंगना सरकार ने 88 लाख
बीपीएल परिवारों के लिए 3,520 करोड़ का आर्थिक पैकेज दिया है। प्रत्येक परिवार को
1500 रुपये नकद और प्रति व्यकित के हिसाब से 12 किलो चावल मुफ्त दिया जाएगा।
· आंध्र प्रदेश की सरकान
ने एक करोड़ बीपीएल परिवारों को एक किलोग्राम अरहर की दाल और चावल देने की घोषणा
की है। सभी परिवारों को 1000 रुपये नगद देने का भी वादा किया है।
· पश्चिम बंगाल ने 7.5 लाख
लोगों को मुफ्त राशन देने की घोषणा की है। असंगठित क्षेत्रों में लोगों को एकबार
1000 रुपये देने की घोषणा की है।
· कर्नाटका में निर्माण
क्षेत्र से जुड़े मजदूरों को 1000 रुपये, आंगनबाड़ी में पढ़ने वाले बच्चों को घर
घर जा कर खाना पहुँचाने की व्यवस्था की है। साथ ही 13.2 करोड़ रुपये की ऋण माफी की
योजना भी लाईं है।
· तमिलनाडू में राशन कार्ड
धारकों को 1000 रुपये, अप्रेल महीने के लिए चावल दान चीनी मुफ्त देने की घोषणा की
है।
बड़े बड़े कारोबारी आये मदद के लिए मैदान में
कोरोना की महामारी से जूझ रहे भारत देश के लिए अब कारोबारी और उद्योगपति सामने
आ रहे हैं। आज हाल ही में टाटा समूह के अध्यक्ष रतन टाटा ने कोरोना से लड़ने के
लिए 500 करोड़ के मदद् की घोषणा की है। रिलायंस समूह के डायरेक्टर मुकेश अंबानी ने
अपने अस्पताल में 100 बेड के कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए पूरी व्यवस्था
करेंगे और साथ ही आपातकालीन सेवा में लगे वाहनों के लिए मुफ्त ईंधन देने की घोषणा
की है। महेन्द्रा ग्रुप के आनंद महेन्द्रा नें अपने लग्जरी रिजार्ट को जहाँ
अस्पताल या मरीजों के क्वारंटाइन के लिए दे दिया है साथ ही कहा कि उनकी निर्माण
इकाईयां वेंटिलेटर निर्माण के कार्य में लगीं हुईं हैं। वेदांता के अध्यक्ष अनिल
अग्रवाल नें 100 करोड़ की मद्द का ऐलान किया है। स्थानिय स्तर के नेता तथा
समाजसेवी भी कोरोना की रोकथाम की मदद के लिए आगे आ रहे हैं। कोई मास्क दे रहा है
कोई सैनेटाईजर दे कर मदद पहुँचा रहा है।
किन किन उपकरणों की है आवश्यक्ता
अब बात यह है कि आगर यह महामारी फैलती है तो किन किन कीमती सामानों की जरूरत
पड़ेगी। हमारे देश की चिकित्सकीय सेवायें इतनी सुद्रण नहीं है कि इस बीमारी का
ज्यादा दबाव झेल सकेंगी। हमारे पास प्रति 1000 व्यक्तियों पर सिर्फ 2.75 बेड
उपलब्ध हैं जबकी चीन के पास प्रति 1000 लोगों पर 4.3 बेड हैं। देश के पास 1
प्रतिशत से भी कम संख्या में वेंटिलेटर उपलब्ध हैं। जिस प्रकार से कोरोन के मरीजों
की संख्या बढ़ रही है इस लिहाज से आने वाले 3 हफ्ते बहुत ही अहम होने वाले हैं।
इसका असर हमारे बाजारों पर भी देखने को मिलेगा। अभी हमारा बाजार पहले से ही आर्थिक
सुस्ती से गुजर रहा है और अब आयात और निर्यात बंद होने से गहरा प्रभाव पड़ने वाला
है। इस संकट में सबसे पहले चिकित्सकीय उपकरण की आवश्यक्ता पड़ने वाली है।
पूरे विश्व में आटो मोबाइल कंपनियों से अपील की जा रही है कि वे इस संकट की
घड़ी में कार बनाने के बजाय वेंटीलेटर का निर्माण आरम्भ कर दें। इसी आधार पर भारत
में भी कार बनाने वाली कंपनियाँ आगे आकर मदद् कर रहीं हैं।
टाटा समूह और महैंद्रा
समूह ने कहा है कि वे तुरंत ही वैंटिलेटर के निर्माण कार्य को शुरू कर रहीं हैं।
क्योंकि आगर स्थितियां और गंभीर होती हैं तो पूरे देश में कई हजार वैटीलेटर की
जरूरत पड़ने वाली है। सभी राज्य सरकारों ने भी वेटिलेटर के निर्माण के लिए
कंपनियों को आर्डर दे दिये है। लेकिन इन आर्डरों की संख्या इतनी ज्यादा है कि
वेंटीलेटर बनाने वाली कंपनियां एक साल में भी इसको पूरा नहीं कर सकतीं हैं। इसलिए
आटोमोबाइल से जुड़ी हुईं कंपनियों से इस काम में मदद ली जा रही है। ब्रिटेन की एक
कंपनी जिसका नाम स्मिथ है। उसने आपना पेटेंट कराया हुआ डिजायन बिना किसी कीमत के
सभी को दे दिया है। अब कई सारी कंपनियां उस डिजाइन के आधार पर सरल, आधुनिक और कम
लागत में वैटिलेटर का निर्माण करने लगीं हैं। भारत की भी कार बनाने वाली कंपनियां
वैटिलेटर बनाने वली कंपनियों से बात कर रहीं हैं कि वे किस प्रकार से नई तकनीक से
वैंटिलेटर बना सकतीं हैं। क्योंकि यह बेहद ही कठिन काम है, सभी मानकों का ध्यान
रखनी भी बेहद आवश्यक है।
लोगों का घरों के अंदर रहना बेहद आवश्यक
सरकार कितनी भी तैयारी कर ले लेकिन अगर लोग घरों से इसी प्रकार से किसी न किसी
बहाने से बाहर निकलते रहे तो इस महामारी से निपटना बेहद ही मुश्किल होने वाला है।
सिर्फ जरूरी सेवाओं से जुड़े लोग ही घर से बाहर पूरी सुरक्षा के साथ मास्क तथा
सेनेटाईजर ले कर निकलें। अपने आस पास रह रहे जानवरों का भी पूरे 21 दिनों तक ख्याल रखे। सुबह सफाई वाले
से, सुरक्षा कर्मियों से और डाक्टरों से अच्छा व्यवहार करें।









शानदार बाबा
ReplyDeleteशुक्रिया भाई ।
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